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Wednesday, July 1, 2020

अब फेफड़े ही नहीं शरीर के हर अंग पर नजर रखने की जरूरत, ब्रेन से लिवर तक कोरोना पहुंचा; रेमेडेसिवीर,  डेक्सामेथासोन ड्रग लाइफ सेवर साबित हुईँ

महामारी के छह महीने बीत चुके हैं लेकिन न तो वैक्सीन तैयार हो पाई है न ही मामले थमते नजर आ रहे हैं। दुनियाभर में कोरोना का आंकड़ा एक करोड़ पार कर चुका है। इन छह महीनों में डॉक्टर्स और अस्पतालों ने कोरोना पीड़ितों के इलाज के दौरान कई नई बातें सीखी और समझी हैं। कोविड-19 के मामले सर्दी, सूखी खांसी और सांस की तकलीफ के साथ शुरू हुए थे लेकिन अब इसके लक्षणों में भी बढ़ोतरी हुई है। ब्रेन स्ट्रोक, पेट में तकलीफ, शरीर में खून के थक्के समेत कई नए लक्षण नजर आ चुके हैं। आज नेशनल डॉक्टर्स डे है। इस मौके परजानिए कोरोना के जरिए विशेषज्ञों को मिली ऐसी पांच सीख जो इलाज में काम आईं...

पहली सीख : कोविड के मरीजों में खून के थक्के जमने पर थिनिंग एजेंट देने से घटे

कोरोना से जूझ रहे मरीजों में खून के थक्के जमने के मामले बेहद आम हो रहे हैं। जो ब्रेन स्ट्रोक की वजह बन सकते हैं। इसका असर दिमाग से लेकर पैर के अंगूठों तक हो रहा है। अमेरिका की ब्रॉउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि पिछले दो महीने से कोरोना संक्रमितों में त्वचा फटने, स्ट्रोक और रक्तधमनियों के डैमेज होने के मामले भी दिख रहे हैं।

खून को पतला करने वालों की दवाओं (थिनिंग एजेंट) से कोरोना पीड़ितों की हालत को 50 फीसदी तक सुधारा जा सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं के मुताबिक, वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों को अगर ऐसी दवाएं दी जाएं तो उनके बचने की दर 130 फीसदी तक बढ़ जाती है। दवा से गाढ़े खून को पतला करने के इलाज को एंटी-कोएगुलेंट ट्रीटमेंट कहते हैं। शोध करने वाली न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई हेल्थ सिस्टम की टीम का कहना है कि यह नई जानकारी कोरोना के मरीजों को बचाने में मदद करेगी।

दूसरी सीख : फेफड़े के अलावा वायरस हार्ट, ब्रेन, किडनी और लिवर पर अटैक कर सकता है

कोरोना वायरस अब सिर्फ फेफड़े ही नहीं हार्ट, ब्रेन, किडनी और लिवर पर भी अटैक कर सकता है। अमेरिकी शोधकर्ताओं ने ब्रेन थैरेपी को कोरोना के गंभीर मरीजों के लिए मददगार बताया है। केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, मस्तिष्क के कुछ जरूरी हिस्से ऐसे होते हैं जो सांसों और रक्तसंचार को कंट्रोल करते हैं।

अगर ऐसे हिस्सों को टार्गेट करने वाली थैरेपी का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया जाए तो उन्हें वेंटिलेटर से दूर किया जा सकता है। अब मरीजों में कोरोना शरीर के दूसरे अंगों को कितना नुकसान पहुंचा रहा है, डॉक्टर्स इसे भी मॉनिटर कर रहे हैं।


तीसरी सीख : एंटीवायरल रेमेडेसिवीर, स्टीरॉयड डेक्सामेथासोन और प्लाज्मा से बेहतर नतीजे मिल रहे

रिसर्च में अब तक एंटीवायरल रेमेडेसिवीर, स्टीरॉयड डेक्सामेथासोन ही दो ऐसी दवाएं हैं जिनका असर कोरोना के मरीजों पर बेहतर असर दिखा है। कई देशों में इसका इस्तेमाल मरीजों पर करने की अनुमति भी मिल चुकी है।

अमेरिकी फार्मा कंपनी गिलीड साइंसेज के पास रेमडेसिवीर का पेटेंट हैं। ग्लेन फार्मा और हेटरो लैब्स के बाद अब सिप्ला ने कोरोना मरीजों के लिए रेमडेसिवीर की जेनरिक मेडिसिन पेश की है। इसका नाम सिप्‍रिमी रखा गया है। हाल ही में भारत में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन ने हेटरो लैब्‍स को रेमेडेसिवीर के जेनरिक वर्जन के मैन्युफैक्चर और सप्लाई की अनुमति दी थी। हेटरो यह दवा भारत में कोविफॉर नाम से बेचेगी जो गेम चेंजर साबित हो सकती है।

कोरोना के मरीजों में कौन सी दवा सटीक काम कर रही है, इस सर गंगाराम हॉस्पिटल की विशेषज्ञ डॉ. माला श्रीवास्तव का कहना है कि कुछ मरीजों में एंटीवायरल, स्टीरॉयड दवाएं बेहतर काम कर रही हैं कुछ में प्लाज्मा थैरेपी। कोरोना के मरीजों के लिए कौन सी एक दवा बेहतर है, यह कहना मुश्किल है।

चौथी सीख : जितनी ज्यादा टेस्टिंग करेंगे उतनी तेजी से हॉस्पिटल में मरीजों का दबाव घटेगा

विशेषज्ञों का कहना मरीजों की संख्या बढ़ने की बड़ी वजह यह नहीं है कि वायरस का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है बल्कि जांच में तेजी आने से मरीज सामने आ रहे हैं। अधिक से अधिक जांच बेहद जरूरी है। मरीज जितनी जल्दी सामने आएंगे मामले कम होंगे और हॉस्पिटल में बढ़ रहे मरीजों की संख्या घटेगी। उन पर इलाज करने का दबाव कम होगा।

हाल ही में आईसीएमआर ने भी अपनी जांच करने की रणनीति का दायरा बढ़ाया है। एसिम्प्टोमैटिक, सिम्प्टोमैटिक की जांच के अलावा इनसे मिलने वालों का भी आरटी-पीसीआर टेस्ट करने की गाइडलाइन जारी की है।


पांचवी सीख : दुनियाभर में कोरोना से जुड़ी हर नई जानकारी डॉक्टर्स तक पहुंचना जरूरी

विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना के मरीजों में दिख रहे नए लक्षण, रिसर्च और वैक्सीन से जुड़े हर अपडेट की जानकारी दुनियाभर के विशेषज्ञों तक पहुंचना जरूरी है। जैसे खाने का स्वाद न मिलना और खुश्बू को न पहचान पाना जैसे लक्षण अमेरिका और ब्रिटेन के कोरोना पीड़ितों में देखे गए, बाद में ये हर देशों के मरीजों में दिखे। ऐसे मामले आम होने के बाद इसके लक्षण अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था सीडीसी ने अपनी गाइडलाइन में शामिल किया। देश में भी इसे कोरोना का लक्षण माना गया। ऐसे मामलों की जानकारी विशेषज्ञों को कोरोना के मामले समझने में मददगार साबित होती है।



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National Doctors Day 2020; what covid teached to doctors and hospitals 5 learning of corona pandemic


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