दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के कॉलेजों के पास एफडी और अन्य खातों में पर्याप्त राशि होने के बावजूद कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जा रहा है। यह आपराधिक है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बात बुधवार को उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ऑनलाइन प्रेसवार्ता में कही। सिसोदिया ने बताया कि कॉलेजों के खातों में कैग के ऑडिटर्स को गड़बड़ी भी मिली है।
उन्होंने इस पर चिंता जाहिर करते हुए कि दिल्ली सरकार ने इन कॉलेजों को वेतन के लिए पर्याप्त धनराशि प्रदान की है, लेकिन ऐसा लगता है कि कॉलेजों ने शिक्षकों को वेतन देने के बजाय उस फंड का दूसरे मद में उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा शैक्षणिक वर्ष के लिए अनुमानित वेतन 300 करोड़ रुपए है। और दिल्ली सरकार ने सहायता के निर्धारित पैटर्न के तहत कॉलेजों को पर्याप्त धनराशि प्रदान कर दी है। सिसोदिया ने कहा कि डीयू प्रशासन भाजपा के पार्टी कार्यालय की तरह व्यवहार कर रहा है। उनका प्रयास दिल्ली सरकार को दोषी ठहराने तक सीमित है।
6 कॉलेजों की प्रारंभिक रिपोर्ट चिंताजनक
सिसोदिया ने कहा कि फंड के उपयोग की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने कैग के ऑडिटर्स से 6 कॉलेज का सितंबर के प्रथम सप्ताह में ऑडिट कराया। इन कॉलेजों की प्रारंभिक रिपोर्ट में चिंताजनक तथ्य सामने आए।
- कॉलेजों ने स्टॉफ को वेतन भुगतान करने के बजाए फिक्सड डिपॉजिट में बड़ी राशि जमा रखी।
- कई कॉलेजों द्वारा ऑडिटर्स की टीम के साथ सहयोग नहीं किया जा रहा।
- छात्रों द्वारा विभिन्न मद के तहत जमा की गई फीस का कोई ऑडिट नहीं किया गया।
- कॉलेज प्रशासन ने नियत प्रक्रिया का पालन किए बिना 25 लाख की राशि दान कर दी।
केशव महाविद्यालय
सिसोदिया ने बताया केशव महाविद्यालय के पास फिक्स डिपोजिट के रूप में 10.52 करोड़ रुपए जमा है। दिल्ली सरकार ने वेतन अनुमान के बतौर वर्ष 2014-15 में 10.92 करोड़ रुपए दिया। पिछले वर्ष 27.9 करोड़ रुपए का भुगतान किया। पांच साल में वेतन अनुदान करीब तीन गुना हो गया। फिर भी कॉलेज वेतन नहीं दे रहा।
भगिनी निवेदिता कॉलेज
कॉलेज के क्लोजिंग बैलेंस के अनुसार लगभग 2.5 करोड़ रुपये फिक्स डिपॉजिट है। वर्ष 2014-15 में कॉलेज को दिया जाने वाला वेतन अनुदान करीब 8.4 करोड़ रुपये था। पिछले साल इसे बढ़ाकर 18 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इतनी सहायता मिलने के बावजूद कॉलेज धन की कमी का दावा कर रहा।
शहीद सुखदेव कॉलेज
शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज ने ऑडिटर्स को अपनी ऑडिटिड बैलेंस शीट नहीं दी। वर्ष 2018-19 की बैलेंस शीट में कॉलेज के पास लगभग 3.5 करोड़ रुपये थे। फिक्स डिपॉजिट में उनके पास 10.45 करोड़ रुपये हैं। लगभग 14 करोड़ रुपए होने के बावजूद डीयू और कॉलेज प्रशासन ने सरकार पर फंड देने का आरोप लगाया।
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