
बुराई पर अच्छाई की जीत के पावन पर्व दशहरा पर राजस्थान के खिलाड़ियों को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ऐतिहासिक तोहफा दिया है। राजस्थान भारत का ऐसा पहला प्रदेश बन गया है जहां कि सैफ गेम्स के मेडलिस्ट को भी आउट ऑफ टर्न सर्विस देने जा रही है सरकार।
राजस्थान के खिलाड़ियों के लिए जिस तरह की आउट ऑफ टर्न पॉलिसी लागू की गई है ऐसी पॉलिसी पूरे भारत में किसी भी राज्य में नहीं है। अब ओलिंपिक, एशियन, कॉमनवेल्थ और सैफ गेम्स के मेडलिस्ट प्रदेश में नौकरी के लिए मोहताज नहीं रहेंगे।
हां, इस पॉलिसी में कुछ कमियां हैं जिससे प्रदेश के युवा खिलाड़ियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस बारे में खेलमंत्री अशोक चांदना ने कहा, हम जल्द ही इस पॉलिसी में संशोधन की फाइल चलाएंगे जिससे कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जूनियर में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को भी सीधे नौकरी मिल सके।
सी-ग्रेड वाले खिलाड़ियों को भी जल्द मिलेगी नौकरी
अभी सीएम ने ए ओर बी ग्रेड वाले खिलाड़ियों को सीधे नौकरी को ओके किया है। जल्द ही सी ग्रेड वालों को भी सीधे नौकरी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। सी ग्रेड में 400 से ज्यादा खिलाड़ियों को सीधे नौकरी मिलने की उम्मीद है।
ए ग्रेड में इन खिलाड़ियों को मिलेगी नौकरी
राजूलाल चौधरी, रजत चौहान, ओमप्रकाश, ओमप्रकाश निठारवाल, जितेन्द्र, शालिनी पाठक, देवेन्द्र झाझड़िया, सुंदर गुर्जर, संदीप मान, कृष्णा नागर, निशा कंवर (पांचों पैरा)। इसके अलावा 18 खिलाड़ियों को बी ग्रेड में नौकरी देने का फैसला हो गया है।
प्रदेश में कांग्रेस के कार्यकाल में खिलाड़ियों के हित मे क्या-क्या किया गया
- पहली बार स्टेट गेम्स का आयोजन हुआ
- पहली बार आउट ऑफ टर्न सर्विस पॉलिसी लागू हुई
- राजस्थान के खिलाड़ियों का टीए-डीए डबल किया गया
- राजस्थान के खिलाड़ियों 25-25 बीघा जमीन दी गई
आगे और क्या-क्या होगा खिलाड़ियों के लिए
- जूनियर अंतरराष्ट्रीय मेडलिस्ट को भी आउट ऑफ टर्न सर्विस का लाभ दिलाया जाएगा।
- 2016 से पहले के मेडलिस्ट को भी इस स्कीम में शामिल कराने की कोशिश होगी
- पहली बार बड़े स्तर पर ग्रामीण खेलों का आयोजन भी किया जाएगा।
- कुछ और खेलों को भी इस पॉलिसी में शामिल कराने का प्रयास होगा।
- पूरे भारत में खिलाड़ियों के लिए राजस्थान जैसी आउट ऑफ टर्न सर्विस पॉलिसी नहीं है। सैफ गेम्स तक के मेडलिस्ट को सीधे नौकरी देने की पॉलिसी एकमात्र राजस्थान में लागू हुई है। इससे प्रदेश में खेलों का वातावरण बनेगा और ज्यादा से ज्यादा युवा खेलों की तरफ आकर्षित होंगे। इससे प्रदेश में नशाखोरी और क्राइम भी कम होगा। अगले 5-10 साल में खेलों में अग्रणी प्रदेश होगा राजस्थान। - अशोक चांदना, खेलमंत्री, राजस्थान सरकार
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